कोरोना की स्थिति पर कविता

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कोरोना पर कविता

            देखने से लग रहा है,

           आज प्रकृति कि छटा बिखर रही है,

           परंतु सुना है कोराना नाम की

           महामारी ने दस्तक ही है।

           सुनी सडकों में गलियों में,

           अब बस आहट ही रह गयी  है,

           परंतु स्वच्छन्द आकाश में,

           पक्षियों की चहचहाहट गुंज रही है।

           अब तो शहरों में न लोगों का,

           ना गाडीयो का शोर कहता है,

          अब तो हर व्यक्ति सोशल डिस्टेनसिंग

           में रहता है।

           पर भय इस बात का है कि

           अब भी यह महामारी तेजी से बढ़ रही है,

           पर शुकर है कुछ महिनों में

           क्राइम की संख्या जो  कम हुई है।

          पर बड़ी अजीब बात है कि

          अब भी कुछ लोग दोष लगाने लगाने में व्यस्त है,

          जरा ये तो देखिये अभी देश की

          अर्थव्यवस्था,राजनीति आज जरा अस्त व्यस्त है।

          अब इस कठिन स्थित में

          कोई जाति धर्म का खेल न यहाँ खेलना,

          क्योंकि सारे जाति धर्म और विदेश से परे,

          आज इंसानियत सबकी एकजुट है।

            और खुश तो आज मैं बहुत हूं

             कि घर से निकलते ही जो छेडते थे,

            आज गली में वो लडके नही,

            और इज्जत लुटकर मुझे निर्भया बनाने वाले

            सड़को पर वो दरिंदे  नही।

           आज तो बस घुले आसमान में

           वो मासूम सा परिंदे हैं,

           जो हमें देखकर नीचे सोच रहा होगा,

           मुश्किल घड़ी में एक जुट हैं।

           लोग इस देश में,

           कि फरिश्ते भी हैं यहां आज डॉक्टर पुलिस

           आदि के भेश में।

            तो बस इस इंसानियत का करें ख्याल,

            जरूरत मंदों को दान करें दान,

            इस महामारी से रहें सावधान,

           और अपना और अपनों के

            साफ सफाई का रखें ध्यान,

            घर के भीतर ही रहें और ईश्वर का करें आह्वाहन।

कोरोना की स्थिति पर कविता 👇 Corona virus l वैश्विक महामारी कोरोना by GAURAV SHARMA
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