Corona Poem । कोरोना

Corona poem

Corona Poem in Hindi

अबतक मिट्टी से सनकर लहू बहाया है,
अब घर-घर से एक-एक सिपाही आया है।
सेवा में है जिन वीरों ने प्राण गवाएं,
आज वो हर वीर खुदा कहलाया है।

सुना है कोरोना ने अब तक न है हार मानी,
मगर है प्रण सबका यहां,
न चलने देंगे कोरोना की मनमानी।
फिर से सूरज बदरी हटाकर चमकेगा,
यहां हार न मानेगा एक-एक हिंदुस्तानी।

माना दिन-ब-दिन सांसे कम हो रही है,
केवल प्रशासन का दोष नही,
कुछ तो अपनी भी है लापरवाही।
अब है हौसला सब में जगाने और
समर्थन लाने की बारी,
अब दुश्मन को कम न आँको भाई।

कोई अपना परिवार छोड़,
तुम्हारे परिवार के लिए सेवा में खड़ा है।
दिन-रात भूख प्यास भूल,
वह भी लड़ रहा है।
फिर क्यों तुम लापरवाही दिखाते हो,
चीख-चीख के कोई कह रहा तुमसे,
तुम मास्क लगाकर दो गज़ दूरी
क्यों नहीं बनाते हो?

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