Corona virus Poetry

फैली हुई है महामारी,कोरोना के नाम की।
लगी हुई है दाव बड़ी,इंसानों के जान की।
कर रहे हैं हिसाब यमजी,मानव के बुरे काम की।
हो रहे थे काम सारे खिलाफ,कुदरत के शान की।
मौतों की संख्या में वृद्धि,यही खबर हर शाम की।
समय बहुत कम है भैया,भज लो नाम श्री राम कि।
काले घने बादल छा गए,खुशियों के संसार में।
अमेरिका जैसे शक्तिशाली राष्ट्र भी,पड़े हुए हैं लाचार से।
चीन साला उबर गया,कोरोना के भार से।
भारत बेचारा जूझ रहा देखो,कोरोना के प्रहार से।
इटली में मौतों की संख्या पार हुई हजार से।
सारे देशों का हाल बेहाल है इस महामारी के मार से।
कोरोना के इस महाजाल से,क्षति हुई हर देश की।
इंसान हो गए कैद घरों में,कमी हो गई है कैश की।
रेले बंद,फ्लाइटे बंद,बंद हो गई यात्रा भी परदेश की।
ना ऑफिस जाना,ना काम कहीं जिंदगी हो गई ऐश की ।
सतयुग सा आ गया मानो,इस कलयुग के दौर में।
कम हो गए अपराध सारे,कोरोना के इस शोर में।
संग रहना संग खाना पीना,बंधा परिवार एक डोर में।
खत्म हुए प्रदूषण सारे,छाई हरियाली हर ओर में।
पता चला इंसानियत का,इस संकट के आने से।
छोड़कर चिंता अपनी जान की,लगे हुए हैं औरों को बचाने में।
देखा नहीं था कभी खुदा को उनके असली स्वरूप में।
ईश्वर ने जन्म लिया धरती पर,डॉक्टरों के स्वरूप में।
ना हाथ मिलाओ,ना बाहर जाओ,यही दवा इस संग्राम की।
मुंह पर मास्क और हाथों की सफाई यही बात है काम की।
लगी हुई है दाँव बड़ी,इंसानों के जानकी।
फैली हुई है महामारी,कोरोना के नाम की।

-GAURAV SHARMA
(Corona virus Poetry)👇

कोरोना की स्थिति पर कविता🍀

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