Best father’s day poem । जिम्मेदारियां लिये चला करता है

Father's day poem
father’s day poem

बेटे भाई और पिता का किरदार

बड़ी ही खूब अदा करता है

वो जो अपने कन्धो पर ,

जिम्मेदारियां लिये चला करता है ।

तुम पुरुष हो रो नही सकते

लोगों की इस बात का

रोज स्मरण किया करता है

वो जो अपने कन्धों पर

जिम्मेदारियां लिये चला करता है ।

मर्द बनो मर्द जिन्हें बचपन से कहा जाता है,

वो चुपके से अपना दर्द

समेट लिया करता है ,

यूं तो लाख परेशानियां हो उसे ,

पर अपने परिवार के सामने

मुस्कुराकर जिया करता है,

वो जो अपने कन्धों पर,

जिम्मेदारियां लिये चला करता है ।

कभी कभी जब वो घर का उत्तरदायित्व

खुद उठा लिया करता है ,

झाडु फिर पोछा लगा लिया करता है ,

अपनी पत्नी माँ और बहन को आराम देकर ,

खाना भी बना लिया करता है,

फिर बच्चो को तैयार करने का

जिम्मा भी उठा लिया करता है ,

हा हा हा . . .

मर्द होकर औरतों वाले काम करते हो…

ऐसा कहकर जब लोग ठहाके मारते हैं,

तू मर्द नही ये सारे ताने मारते हैं ,

तब बड़े गर्व से वो कहता है,

औरत की इज्जत करना तो

हर मर्द का कर्तव्य रहता है ।

वो जो अपने कन्धो पर ,

जिम्मेदारियां लिये चला करता है ।

जब जब पुरुषत्व साबित करने के लिए

किसी द्रोपती का चिरहरण हुआ करता है,

तब तब यहाँ भ्राता कृष्ण का भी हुआ करता है।

मर्द वही जो सबकी भावनाओं का आदर करे ,

पुरुषत्व उसी का जो अपनी

बेटी बहन पत्नी की रक्षा किया करता है।

वो जोअपने कन्धो पर ,

जिम्मेदारियां लिये चला करता है।

father’s day poem
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