Poem On Friendship Day । मुझे तेरी दोस्ती चाहिए

poem on Friendship day

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poem on Friendship day

फिर से वो बचपन की बहार चाहिए,
मुझे तेरी दोस्ती उधार चाहिए।
फिर वही शरारत बेशुमार चाहिए,
मुझे तेरी दोस्ती उधार चाहिए।।

ना कंधे पर जिम्मेदारी,
बस‌ खुशियों की हिस्सेदारी,
ना समझते थे दुनियादारी,
बड़ी सही थी अपनी यारी।
फिर वही बचपन अब एक बार चाहिए,
मुझे तेरी दोस्ती उधार चाहिए।

अब खुलकर जिए एक जमाना हो गया,
ना जाने कहां सबका ठिकाना हो गया,
वो पुराना मोहल्ला अब अनजाना हो गया,
यादों का मोहताज ये याराना हो गया।
अब फिर‌ से एक बार पुराना यार चाहिए,
मुझे तेरी दोस्ती उधार चाहिए।
फिर से वो बचपन की बहार चाहिए,
मुझे तेरी दोस्ती उधार चाहिए।।
written by — PRATIMA

Phir se voo bachpan ki bahaar chahiye,
Mujhe teri dhosti udhaar chahiye….
Phir vahi shararat beshumaar chahiye,
Mujhe teri dhosti udhaar chahiye…..

Naah kandhe par jimmedari,
Bas khushiyon ki hissedari,
Naah samjhte the duniyadari,
Badi sahi thi apni yaari….
Phir vahi bachpan ek baar chahiye,
Mujhe teri dhosti udhaar chahiye…..

Ab khulkar jiye ek zamana ho gaya,
Naah jaane kahan sabka thikana ho gaya,
Voo purana mohalla anjaana ho gaya,
Yaadon ka mohtazz ye yaarana ho gaya….
Ab phir se ek baar purana yaar chahiye,
Mujhe teri dhosti udhar chahiye….
Phir se voo bachpan ki bahar chahhiye,
Mujhe teri dhosti udhaar chahiye…..

poem on Friendship day 👇(see more)
Best poem in Hindi on friendship l दोस्ती….🤝

2 thoughts on “Poem On Friendship Day । मुझे तेरी दोस्ती चाहिए”

  1. Priyanka says:

    Nice lines😊😊

  2. Golu says:

    Dill khush krr diyaa

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