Poem on women empowerment ।अब लौह बनकर निकलूंगी🔥

Poem on women empowerment

Poem on women empowerment

जलती रही तेरे झूठे अभिमान के अंगारों में,
अब लौह बनकर निकलूंगी,
जो छुआ तूने मुझे तो
सबसे बुरा तेरा हश्न करूंगी।

बहुत गुरूर है तुझे तेरी मर्दानगी पे,
तो ले आ छुले मुझे ,
लेकिन जब-जब निकलेगा वस्त्र मेरा,
उस यम को मैं तौफा तेरा दूंगी,
हाँ सही समझा तू
तुझे मै मौत का कफन पहना दूंगी।
जलती रही तेरे हवस के अंगारो में,
अब लौह बनकर निकलूंगी ।

बहोत पिघला लिया तूने मुझे अरे ! दुष्ट
अपने मन की वासना मे,
अब देख मैं तेरा क्या करूंगी।
जलती रही तेरी प्रतारड़ा में,
अब तिल तिल न मरूंगी,
न ही फिर किसी लडकी को
तेरी वासना की अग्नि में जलने दूंगी।

तू समझ न की अब छुप जायेगा,
तू कानून की बेड़ियों में,
मैं अब काली बनूंगी,
तू क्या मुझे छुएगा,
अब लौह बनकर निकलूंगी ।

POEM ON WOMEN EMPOWERMENT । AB LAUHH BANKAR NIKLUNGI

Jalti rahi tere jhuthe abhimaan ke angaron mein,
Ab lauhh bankar nikalungi,
Jo chhua tune mujhe toh,
Sabse bura tera hashra karungi…..

Bahut guroor hai tujhe teri mardaanagi pe,
Toh le aa chuh le mujhe,
Lekin jab-jab nikalega vastra mera,
Uss yam ko main tohfa tera dungi,
Haan sahi samjha tu,
Tujhe main maut ka kaphan pehna doongi,
Jalti rahi tere havas ke angaaro mein,
Ab lauhh bankar nikalungi…..

Bahot pighala liya toone mujhe arre! dusht
Apni mann ki vaasana mein,
Ab dekh main tera kya karungi…..
Jalti rahi main, teri prataadana mein,
Ab till till naah maroongi,
Naa hi phir kissi ladki ko,
Teri vaasana ki agni mein jalane dungi…..

Tu naa samajh, ki ab chupp jayega,
Tu kaanoon ki bediyon mein,
Main ab kaali banungi,
Tu kya mujhe chhuyega,
Ab lauhh bankar nikalungi…..

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5 thoughts on “Poem on women empowerment ।अब लौह बनकर निकलूंगी🔥”

  1. आज के युग मे रानी लक्ष्मी बाई जैसे साहसी बनना अत्यंत कठिनाई हो गया है।

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