Sad poetry । जब मिले नहीं थे तुम

Sad poetry

Sad poetry in Hindi

जब मिले नहीं थे तुम,
हर पल खुशियों भरा होता था।
उम्मीदें नहीं थी किसी से ,
खुद पर भरोसा होता था ।

सीधी साधी भोली भाली चुपचाप सी मै रहती थी,
अपनी जिंदगी मै अपने उसूलों से जिया करती थी

ऊंचा काम ऊंचा नाम इस बात पर भरोसा करती थी,
लोगो के सामने अपनी मुस्कान परोसा करती थी ।

आए जब से तुम जिंदगी मै तुम्हारा ही नाम जपा करती थी,
तकलीफ कितनी भी हो मुझे तुमसे मोहब्बत का इजहार किया करती थी।

दिन बीते साल बीते प्यार के लिए तुमसे मिन्नते बार बार किया करती थी,
खुद का आत्मसम्मान भूलकर तुमसे माफी की गुहार किया करती थी ।

लोगो की बाते भूलकर सिर्फ तुम्हारे लफ्ज़ सुना करती थी,
घर परिवार छोड़ कर तुम्हारी पनाह लिया करती थी ।

एक दिन ऐसा भी आया जब मैंने खुद से पूछा क्या यही है,
वो जिसके सपने मै दिन रात बुना करती थी।

आंसू देकर खुशियां छीनकर जब तुम चले गए,
सबकुछ होने के बाद मुझे लगा
मै तो खुद से प्यार किया करती थी ।

ना जरूरत थी किसी की मुझे किसी से कोई उममीद थी,
खुद के दम पर आगे बढ़ने में जिंदगी की असली जीत थी।

–PRIYANKA SAHU
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    14 thoughts on “Sad poetry । जब मिले नहीं थे तुम”

    1. बदले-बदले से हैं मिज़ाज उनके, जाने क्या बात हो गई…
      पूछो जरा शिकायत तुमसे हैं, या किसी और से मुलाकात हो गई…

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