The life poem l शब्द नहीं कुछ कहने को

The life poem

Life poem in hindi

शब्द नहीं कुछ कहने को इसलिए
निःशब्द भावों से कहती हूं।
मुझे लिखने का शौक है इसलिए
कल्पनाओं में जीती हूं।
लहज़ा है मेरे अंतर्मन का
कभी बड़ी ही कश्मकश में रहती हूं।

भाव विभोर हो जाती है यें निगाहें भी
जब अंर्तमन के भावों को शब्दों में भिगोती हूं।
शब्द नहीं, कुछ कहने को इसलिए
नि:शब्द भावों से कहती हूं।

सहज,सुबोध,ज्ञान वंदन
मैं मन के विभागों से करती हूं।
नि:संदेह दुनिया की भीड़ में
अपनी किताबों से कहती हूं।
शब्द नहीं कुछ कहने को
इसलिए नि:शब्द भावों से कहती हूँ।

THE LIFE POETRY । SHABD NAHI KUCHH KAHNE KO

shabd nahi kuchh kahne ko issiliye,
nihshabd bhaavon se kahti hoon.
mujhe likhne ka shauk hai issiliye,
kalpanaon mein jeeti hoon,
lahaza hai mere antarman ka,
kabhi bade hee kashmakash mein rahati hoon.

bhaav-vibhor ho jaatee hai ye nigaahen bhi,
Jan antarman ke bhavon ko shabdon me bhigoti hoon.
shabd nahin kuchh kahane ko isalie
nihshabd bhaavon se kahati hoon.

sahaj,subodh, gyaan-vandan,
main mann ke vibhaagon se karati hoon.
nihsabdeh duniya kee bheed mein
shabd nahin kuchh kahane ko issiliye
nihshabd bhaavon se kahati hoon.

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One thought on “The life poem l शब्द नहीं कुछ कहने को”

  1. Verma sisters says:

    Great poem sir 👍👌😃

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