Women Poetry l तेजाब एक प्रतिशोध

Women Poetry

WOMEN POETRY IN HINDI..

*लोग कहते हैं शर्म और लाज़ तो
लड़कियों का गहना है।

मैं भी अपनी इज्ज़त ढ़ककर चला करती थी।
सीने पर लंबा सा दुपट्टा और सिर से पैर तक
खुदको ढका करती थी।*

पर उस रोज इस एक सच से
मैं वाकिफ हुई ,
की लड़कियों को कभी भी
किसी लड़के को
“ना”कहने का अधिकार नहीं।

उस दिन उस शख्स ने मुझसे
अचानक रास्ते में मुलाकात की,
उसने खिंचा, मेरा दुपट्टा और
बड़ी ही बत्तमीजी से मुझसे बात की।
मनो उसदिन ऐसे लगा ,
अगर शर्म और लाज़ की जगह मुझे घर वालों ने,
बहादुरी और हिम्मत की गहने पहनाये होते तो,
बड़ा ही मुंह तोड़ मैं इसे जवाब देती ।

पर थोड़ी बहादुर और लड़ाकू तो मैं
बचपन से ही थी।
कभी घर वालों के कानूनों का विरोध करती,
तो कभी दायरों से बाहर जाकर,
कुछ अलग करने की कोशिश करती।

और उस रोज उस शख्स को मैंने,
उसी हिम्मत के साथ पलटकर जवाब दिया।
थप्पड़ मारा और कहा,
शर्म तुझे आनी चाहिए ,मुझे नहीं ।
लड़की हूं मैं,रूह है मेरी भी।
मैं सिर्फ जिस्म का टुकड़ा नहीं।
जो सरेआम तुम मेरी इज्जत
नीलाम कर रहे हो।
सुधर जाओ, अब भी कुछ बिगड़ा नहीं।

शायद मेरी इस बात का उस पर,
ज्यादा ही असर हो चला था।
इश्क में डूबा हूं कहता है जो वह लड़का,
मुझे फिर उसी रास्ते में मिला था।

*पर इस बार मेरी बहादुरी के बदले ,
उसके भीतर प्रतिशोध की अग्नि जल रही थी।
नहलाकर चला गया वो मुझे तेजाब मे,
मेरे चेहरे पर मेरे हिम्मत के ही धब्बे लिखे थे।*

बेरंग सी दुनिया फिर मेरी हो गई।
आज समझ आया कि इस समाज के
दायरों को लांघना क्या होता है।
किसी लड़के को
“ना” कहना क्या होता है।

आज समझ आया कि
मेरा पलटकर हिम्मत दिखाना,
मुझे बर्बाद भी कर सकता है,और
उस लड़के के अहंकार को,
और आबाद भी कर सकता है।

और लोग कहते हैं
शर्म और लाज़ तो
लड़कियों का गहना है…..

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